सुराज्य और स्वराज्य
सुराज्यऔरस्वराज्य
सुराज्य के मंजिल को छूने से पहले ही,
यह स्वराज्य बिखर सा गया,
टूट गयी इसकी अखंडता,
फूट गयी इसकी एकता।
विनाश के दरिया में डूब सा गया,
यह निर्विघ्न विकास का सपना,
चरमरा गयी इसकी अर्थव्यवस्था,
ढह गया इसका कायाकल्प।
नीव को मजबूत करने के चक्कर में,
ढह गया कमज़ोर नीव पर बनने वाला यह महल,
न बच सकी वह श्रेष्ठतम कला शिल्प की यह मिसाल,
न जल सकी उसमे विकास की अद्वितीय मिसाल।
गाँधी नेहरु के सुराज्य के सपनो को ,
पूरा न कर सका यह स्वराज्य,
अनिश्चितता के भंवर में,
डूब गयी महापुरुषों की यह कल्पना।
गद्दारों की गद्दारी, भ्रष्टों के भ्रष्ट आचरण,
नेताओं की कोरी बकवासें,
ये कह रही हैं हमें,
हमें स्वराज्य तो प्राप्त हो गया, पर सुराज्य न मिल सका।

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