मृदु बसंत
मृदु बसंत
मस्त फकीरों सा यह बसंत बहार,
मृदु उल्लसित, मृदु हर्षित विचार,
मृदु मधुमयी विस्तृत खुशियाँ अपार,
तीव्र कन्ताकिन पर होता प्रहार।
बसंत की है रूप निराली,
मधुर कूकती है कोयल काली,
आमों की डालों की अद्भुत लाली,
प्रस्तुत करती अद्भुत छटा।
मंद- मंद मुस्काता यह हृदय,
तालों पर देता यह रिदम,
मृदु बसंत की अद्भुत बहार में,
दली नृत्य करता मन का विचार है।


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