इक्कीसवी सदी
इक्कीसवी सदी
नव माधुर्य, नया संकल्प,
विज्ञानं, प्रगति, और अनसुलझे गल्प,
इक्कीसवी सदी के न होंगे विकल्प.
क्या पृथ्वी, क्या सूर्य, क्या शनि, क्या वरुण,
सिमट गया यह संसार,
सिमट गयी यह सृष्टि ।
कंप्यूटर, इनसेट, विमान और रॉकेट ,
मिनटों में पट जाती दूरी,
हल हो जाता प्रश्नों का अम्बार,
अब कही नहीं ख़ुशी और गम का व्यवहार।
दुनिया भागती जा रही ,
समय भागता जा रहा,
तीव्रतर से तीव्रतम के सापेक्ष्य,
हर दूरी , हर मंजिल हो रहा निकटतर से निकटतम।
इक्कीसवी सदी पर्याय है,
नए विज्ञान का,
जाते ईमान का,
गुप्त होते भगवन का,
और अद्भुत सामान का।


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